संकट के दौर के असली नायक, उज्जैन के उद्योगपति श्री आनंद बांगड़ ने खामोशी से किये 36 लाख रु. दान
सेतुसंकल्प उज्जैन। देश इस वक्त संकट के दौर का सामना कर रहा है । कोरोना महामारी में दान दाताओं में भी दो तरह की प्रवृति नजर आई एक वे लोग जो जरा सा भी दान कर रहें है तो उसके फोटो खींचकर सोशल मीडीया पर स्वयं का महिमामंडन करने लगते है । वे चाहते है लोग उनकी खूब तारीफ करें । सामान्य समय मे भी राजनीति से जुड़े लोग सरकारी अस्पताल में एक केले,दो बिस्किट के साथ 20 लोग दान देते हुए फोटो खिंचवा लेते है । लेकिन दूसरे तरह के लोग वे होते है जो लाखों दान करने के बाद भी उसका कोई दिखावा नही करते है । ऐसे ही उज्जैन के उद्योगपति श्री आनंद बांगड़ जिन्होंने 36 लाख रुपये दान करने के बाद भी उसका कोई प्रचार-प्रसार नही किया । संयोग से उनके साथ रहने वाले मेरे एक मित्र का जन्मदिन था मेने उन्हें शुभकामनाओं हेतु फोन किया उन्होंने तब मुझे इस विषय की जानकारी दी में आश्चर्यचकित रह गया कि जरा-जरा सा दान करने वाले तो बड़े-बड़े प्रेस नोट जारी कर रहें है लेकिन क्या इस कलयुग में ऐसे भी उद्योगपति हो सकते है यह किसी सुखद कल्पना की तरह महसूस होता है । श्री आनंद बांगड़ उज्जैन का गौरव है उन्हें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है । श्री आनंद बांगड़ एक ऐसे अत्यंत प्रतिष्ठित उद्योगपति हैं, जिन्होंने न सिर्फ उद्योग विहीन होते उज्जैन शहर बल्कि देश को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान दिलवाई है, जिस पर सभी को गर्व है। उन्होंने पैकेजिंग जैसे ऐसे क्षेत्र में सम्पूर्ण विश्व में सर्वश्रेष्ठता का ध्वज फहराया है, जिस पर सिर्फ अमेरिका का ही एकाधिकार था।एक चलन सा है जैसे ही लोग थोड़ा आर्थिक संपन्न होते है अपने उज्जैन शहर को छोड़कर इंदौर में बस जाते है । लेकिन अपनी माटी से प्रेम रखने वाले श्री आनंद बांगड़ आज भी उज्जैन में ही रहते है । इतनी सादगी से रहते है कि आपके सामने यदि आ जाये तो आप पहचान नही पाएंगे कि यह वे उद्योगपति है जिनके देश-विदेश में अनेको उद्योग है । जहां एक ओर उज्जैन में अनेक उद्योग बन्द हुए लेकिन आज भी अपने कुशल प्रबन्धन से उन्होंने हजारों लोगों को रोजगार प्रदान किया हुआ है । लगभग तीन दशक पूर्व उज्जैन में एक दौर आया था कि एक-एक कर बंद होते उद्योगों ने शहर को उद्योग विहीन कर दिया। नवउद्यमी भी यहाँ उद्योग स्थापना से बच रहे थे। तब श्री आनंद बांगड़ ने न सिर्फ उद्योग की स्थापना की बल्कि सफल संचालन करके आज देश-विदेश में सफलता की पताका फहराई है । जरा सा आर्थिक संपन्न व्यक्ति घमंड के जाल में फंस जाता है लेकिन श्री आनंद बांगड़ को घमंड कभी छू भी नही पाया । आज भी वे हर व्यक्ति को सम्मान देते है । चीन के वुहान प्रांत से फैले कोरोना वायरस ने भारत में हाहाकार मचा दी है। कोरोना से अब तक देश में मरने वालों की संख्या 2500 के पार पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को कोरोना से लड़ने के लिए पीएम केयर्स फंड की शुरुआत की। जिसका पूरे देश ने समर्थन किया । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से आर्थिक मदद की अपील की है, जिसके बाद आम आदमी से लेकर बड़े उद्योगपति तक मदद के लिए सामने आ रहे हैं । उज्जैन के उद्योगपति श्री आनंद बांगड़ ने 

25 लाख रुपये पीएम केयर्स में एवं 11 लाख रुपये सीएम फंड में कोरोना महामारी से लड़ने के लिए दान दिए है । सरकार ने कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई तेज करने के लिए बुधवार को पीएम केयर्स फंड से 3,100 करोड़ रुपए जारी किए।

आत्मनिर्भर भारत अभियान में उज्जैन के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है श्री आनंद बांगड़ :- उनके उद्योग समूह ‘‘द पैकेजिंग पीपुल ग्रुप’’ में वर्तमान में श्रीनिवास बोर्ड एंड पेपर्स प्रा.लि., श्रीजी पॉलीमर्स इंडिया लि., तिरुपति कोरगेटर्स, वैंकटेश कोरुगेटर्स, उज्जैन पैकेजिंग प्रा.लि., श्री पैकेजिंग, पद्मा पॉलिटेक्स तथा अर्पित प्लास्टिक प्रा.लि. जैसे प्रतिष्ठित उद्योग शामिल हैं। उज्जैन के साथ ही उनके उद्योग की ईकाइयां पीथमपुर, हैदराबाद और गोवा में भी स्थापित हैं। कंपनी वर्तमान में फॉर्मास्टिकल पैकेजिंग के लिए बॉटल, कैप्स और विभिन्न सामग्री बनाती है, जिन्हें भारत की सभी बड़ी फॉर्मास्टिकल कंपनी के लिए तैयार किया जा रहा है। साथ ही जो पैकेजिंग मटेरियल डेवलप किया, उसकी मांग अब भारत ही नहीं यूरोप, अमेरिका, चायना सहित अन्य देशों में भी बढ़ने लगी है। उज्जैन में स्थापित इकाई में अत्याधुनिक मशीनों के जरिये प्रतिदिन 2 मिलियन (20 लाख) प्लास्टिक बॉटल और 2 मिलियन ढक्कन बनाए जाते हैं। 2005 में उज्जैन में यह इकाई श्री आनंद बांगड़ ने शुरू की थीं। शुरुआत में यहां 150 कर्मचारी काम करते थे, लेकिन अब 1500 कर्मचारियों को यह रोजगार देती है। 


लेखक मिलिन्द्र त्रिपाठी