बच्चों का साल बिगड़ जाए लेकिन उनकी जिंदगी नही खराब होने देंगे...! बच्चें हमारे है सरकार के नही...! बच्चों का ध्यान भी हमे ही रखना होगा...! यह बात अभिभावक सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहें है । वही लाखों की तादात में विद्यार्थियों की तरफ से भी यह मांग की जा रही है कि 3 माह से एक भी दिन क्लास नही लगी है । सारे कोर्स अधूरे है 6 माह के सेमिस्टर में से 5 माह क्लास लगती है उनमें से भी 3 माह कोरोना के कारण क्लास नही लगी जिसके कारण पाठ्यक्रम अधूरा है केवल 20 % पाठ्यक्रम पूर्ण हुआ है । ऐसे में कॉलेज के विद्यार्थियों की परीक्षा कैसे संभव है यह समझ के बाहर है। हाल ही में सरकार की ओर से आदेश आये है कि जुलाई तक सभी यूनिवर्सिटी परीक्षा संपन्न कराने पर ध्यान दें । वही नेता कह रहे है कि बिना परीक्षा किसी को प्रमोशन नही दिया जा सकता । इस पर विद्यार्थियों की तीखी प्रतिक्रिया आयी है कि नेता बिना चुनाव के सरकार बना सकते है लेकिन विद्यार्थी बिना परीक्षा दिए पास हो जाये तो कौन सा पहाड़ टूट जाएगा । वही बुद्धिजीवी वर्ग ने मौखिक साक्षात्कार के आधार पर परीक्षा आयोजित करने का सुझाव दिया है । 1 से लेकर 5 क्लास तक के बच्चो के अभिभावक किसी भी सूरत में कोरोना के पूर्ण खत्म हुए बिना अपने बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने के पक्ष में नही है । वही अनेकों छात्र जो अन्य शहरों में रहकर पढ़ाई कर रहें थे । उन्होंने होस्टल फीस एवं मकान किराए की छूट की मांग सरकार से की है । मकान मालिक उनके समान पर कब्जा कर रहें है और कह रहे है किराया जमा करो अन्यथा समान वापस नही दिया जाएगा । जब देश के कई राज्यों में छात्रों को जनरल प्रमोशन दे दिया गया है तो मध्यप्रदेश में क्यों नही...? नेताओं के अनुसार अगर जनरल प्रमोशन मिला तो छात्रो का भविष्य खराब हो जाएगा । मतलब की जितने राज्य अभी तक जनरल प्रमोशन दे चुके उन राज्यों के छात्रो का भविष्य बिगड़ चुका है...? जिन राज्यों ने छात्रो की जान का सोचा उन्होंने जनरल प्रमोशन दिया छात्रों का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब उनका जीवन होगा । जीवन ही संकट में चला जाये तो काहे का भविष्य...? एक ट्वीट्स में कहां गया है कि हम विद्यार्थियों ने ऐसा मांगा क्या है जो इतनी दिक्कत है...? जहां बच्चों ने जनरल प्रमोशन के लिए लाखों ट्वीट कर दिए लेकिन अभी तक किसी के कान पर जू तक नहीं रेंगी...! मध्यप्रदेश में 12 वी की परीक्षा होने वाली है अनेकों छात्र है जो गांव लौट गए है। वो वापस शहर आने को मजबूर हो रहें है । शहरों में अभी तक कोरोना फैल रहा है । बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ नही करना चाहिए । छात्र सरकार से निवेदन कर रहें है कि छात्रों के भविष्य के साथ उनकी ज़िन्दगी के बारे मे भी सोचिए ।अगर परीक्षाएं हुई तो छात्रों के साथ परिवार को संक्रमण का खतरा है साथ ही छात्रों को अगले वर्ष के बहुत कम महीने ही मिलेंगे। विद्यार्थियों को जनरल प्रमोशन दिया जाना जायज है ।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को विद्यार्थी मामा कहकर बुलाते है एक ट्वीट में विद्यार्थियों ने मामा के नाम ट्वीट करते हुए लिखा है कि
"प्रिय मामा कोरोना संकट को देखते हुए अन्य राज्यो के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी छात्रो को जनरल प्रमोशन देकर अगली कक्षा में भेज दिया है । आपसे निवेदन है कि अपने भांजे और भांजियो के स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन के लिये उन्हे अगली कक्षा में भेजने की कृपा करे!"
मध्यप्रदेश में कोरोना का खतरा अभी भी बना बना हुआ है । ऐसे में सरकार का परीक्षायें लेना विद्यार्थियों के जीवन और स्वास्थ से खिलवाड़ होगा । सोशल डिस्टेंसिंग का कैसे पालन होगा...? सरकार विधार्थियों को जनरल प्रमोशन दे, देश के भविष्य को खतरे में ना डालें...!
(उक्त लेख में दिए गए विचारों में अनेकों ट्वीट्स के माध्यम से विद्यार्थियों द्वारा उठाई मांग को शामिल किया गया है । )
लेखन एवं संकलन मिलिन्द्र त्रिपाठी